भोजपुर जिले में राशन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए चलाए गए विशेष अभियान में बड़ा खुलासा हुआ है। अब तक 10,184 राशन कार्ड रद किए गए हैं और 34,618 अपात्र लाभार्थियों के नाम सूची से हटाए गए हैं।
भोजपुर जिले में राशन व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इस अभियान के तहत अब तक 10,184 राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं, जबकि 34,618 अपात्र लाभार्थियों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। जांच के दौरान यह सामने आया कि कई फर्जी लोगों, मृत व्यक्तियों के नाम पर वर्षों से राशन उठाया जा रहा था, साथ ही कई आर्थिक रूप से सक्षम और प्रभावशाली लोग भी गरीबों की श्रेणी में शामिल होकर सरकारी अनाज का लाभ ले रहे थे। जिला प्रशासन ने जनवरी माह से इस अभियान की शुरुआत की थी, जिसे अब और अधिक तेज कर दिया गया है। आरा, पीरो और जगदीशपुर तीनों अनुमंडलों में एसडीओ के नेतृत्व में मार्केटिंग अधिकारियों की टीमें लगातार क्षेत्र में जाकर जांच कर रही हैं और गड़बड़ियों को चिन्हित कर कार्रवाई कर रही हैं।
कार्रवाई के दौरान आरा अनुमंडल में सबसे अधिक अनियमितताएं सामने आई हैं, जहां 6,585 राशन कार्ड रद्द किए गए और 17,380 लाभार्थियों के नाम हटाए गए। इसके अलावा जगदीशपुर अनुमंडल में 1,039 राशन कार्ड रद्द किए गए तथा 11,852 अपात्र लोगों को सूची से बाहर किया गया है, जबकि पीरो अनुमंडल में 2,560 राशन कार्ड रद्द कर 5,386 लाभार्थियों के नाम हटाए गए हैं। विभिन्न प्रखंडों में कहीं राशन कार्ड रद्द होने की संख्या अधिक है तो कहीं लाभार्थियों के नाम कटने की संख्या ज्यादा पाई गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे जिले में अलग-अलग स्तर पर गड़बड़ियां फैली हुई थीं। वर्तमान में जिले में लगभग 4.85 लाख राशन कार्डधारी परिवार हैं, जिनसे करीब 22 लाख लाभुक जुड़े हुए हैं, इसलिए इस तरह की जांच का व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।
प्रशासन का मानना है कि इस सख्त कार्रवाई से अब केवल वास्तविक जरूरतमंद लोगों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी। सदर एसडीओ शिप्रा विजयकुमार चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आम जनता से भी अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की सूचना तुरंत प्रशासन को दें, ताकि राशन वितरण व्यवस्था को पूरी तरह निष्पक्ष, ईमानदार और प्रभावी बनाया जा सके।